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ईरान मुद्दे पर कांग्रेस में मतभेद? शशि थरूर ने कहा - चुप रहना भी रणनीति!

Satish Patel
Satish Patel
19 March 2026, 11:10 AM · 1 मिनट पढ़ें · 31 बार देखा गया
ईरान मुद्दे पर कांग्रेस में मतभेद? शशि थरूर ने कहा - चुप रहना भी रणनीति!

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों और सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के निधन के बाद भारत का राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। इस गंभीर वैश्विक परिस्थिति में भारत सरकार की चुप्पी पर कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं के विचारों में विरोधाभास दिखा है। सोनिया गांधी ने सरकार की आलोचना करते हुए इस रवैये को 'नैतिक पतन' बताया, जबकि सांसद शशि थरूर ने इसे एक जिम्मेदार और सुविचारित कूटनीति करार दिया है।

सरकार की चुप्पी पर सोनिया गांधी का प्रहार

सोनिया गांधी ने एक लेख के माध्यम से सरकार पर हमला करते हुए कहा कि ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन और एक राष्ट्राध्यक्ष की हत्या जैसे गंभीर मामलों पर नई दिल्ली की चुप्पी भारत की विदेश नीति की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के बावजूद भारत सरकार द्वारा इसकी निंदा न करना आश्चर्यजनक है।

हालांकि, शशि थरूर ने सोनिया गांधी के इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि हर परिस्थिति में सार्वजनिक रूप से निंदा करना ही एकमात्र विकल्प नहीं होता। थरूर के अनुसार, भारत की यह चुप्पी कोई कमजोरी नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए एक व्यावहारिक और रणनीतिक निर्णय है।

शशि थरूर के तर्क और भारत के रणनीतिक हित

शशि थरूर ने भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों का हवाला देते हुए समझाया कि खाड़ी देशों के साथ भारत का वार्षिक 200 अरब डॉलर का व्यापार है और वहां 90 लाख भारतीय रहते हैं। इसके अलावा, भारत की ऊर्जा जरूरतें भी इस क्षेत्र पर निर्भर हैं। ऐसी स्थिति में किसी भी एक पक्ष का खुलकर विरोध करना भारत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका के साथ रक्षा और तकनीकी संबंधों और चीन जैसी चुनौतियों को देखते हुए संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है। थरूर ने इतिहास याद दिलाते हुए कहा कि अतीत में भी भारत ने सोवियत संघ जैसे मित्र देशों के हित में कई बार चुप्पी साधी है, जो कूटनीति का ही एक हिस्सा है।

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